75 मंजिला होटल और तीन दोस्त / दुःखी घड़ा | 2 Moral Story for Students

 Moral Story for Students – कहानियां वैसे तो कहानी ही होती है.

लेकिन कभी कभी कहानियों के पीछे भी बड़ा Moral छुपा हुआ होता है.

ये Moral हमारी जिंदगी के कई मामलो को समझने में हमारे काम आता है. खासकर Students को

ऐसी 2 Story यानी की कहानियां आपके सामने पेश कर रहे है. लीजिए..

1. दुःखी घड़ा / Moral Story for Students

एक किसान के पास दो मिट्टी के घड़े थे जो उसने किसी कुम्हार से खरीदे थे.

किसान हर रोज अपने खेत में जाते हुए दोनों घडो में पानी भर कर ले जाता था.

ताकि जब भी उसे प्यास लगे तब वो उसमें से पानी पी सके.

एक दिन दोनों में से एक घड़े में एक छोटा छिद्र हो गया.

जिससे उस खड़े का पानी बह जाता था.

फिर भी छिद्र छोटा होने की वजह से किसान ने उस खड़े का उपयोग जारी रखा.

अब होता ऐसा था कि किसान जब घर से दोनों घरों में पानी भरकर खेत में जाने के लिए निकलता तो खेत तक पहुंचते – पहुंचते दोनों में से एक घड़े में ही पानी बचता.

और फूटा हुआ घड़ा बिल्कुल खाली हो जाता.

ये देखकर टूटे हुए घड़े ने अपने साथ वाले घड़े से कहा,

” मुझे दुख हो रहा है कि मैं इस किसान के कुछ काम नहीं आ रहा.

किसान बेचारा मुझ में पानी भरकर रोज खेत तक ले आता है.

लेकिन मैं उस पानी का बचाव नहीं कर पाता और सारा पानी व्यर्थ जाता है ..”

इस पर दूसरे घड़े ने उसको जवाब दिया,

” तुम्हें निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि भले ही तुम टूटे हुए हो लेकिन तुम्हारी वजह से किसान को लाभ हो रहा है ”

फूटे हुए घड़े ने कहा भला जब मैं पानी ही नहीं बचा सकता तो किसान को मुझ से क्या लाभ होगा ? ”

दूसरे घड़े ने जवाब दिया कि,

” तुम खेत में आने के रास्ते की एक तरफ जिस तरफ तुम्हे रखा जाता है वहां देखोगे तो पता चलेगा कि वहां फूल और पेड़ पौधे खिले हुए रहते हैं, जबकि मेरी तरफ वाले किनारे पर ऐसा कोई नजारा नहीं दिखता ….

” इसका मतलब यह है कि जब भी किसान तुम्हें लेकर इस रास्ते से खेत जाता है तो इस रास्ते के पेड़ पौधे और फूलों को तुम्हारी वजह से भरपूर पानी मिल जाता है. जिस कारण वह हरे-भरे बने रहते हैं. ”

फूटे घड़े ने जब यह दृश्य देखा तो वाकई में उसे लगा कि उसे बेकार नहीं समझा गया.

और जैसी भी स्थिति है वह उसी स्थिति में भी किसान के काम आ रहा है.

सीख / Moral

1). इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपनी कमजोरियों को अपनी मजबूरी नहीं बनाना चाहिए.

बल्कि हमारी कमजोरियों को ही हमारा हथियार बनाना चाहिए.

2). इस कहानी से एक और सीख ये भी मिलती है कि हमें अपने दिमाग से ही परिणाम समझ कर खुद को ना उम्मीद नहीं करना चाहिए.


2. 75 मंजिला होटल और तीन दोस्त / Moral story for Students

एक शहर में तीन अच्छे दोस्त रहते थे. जो आपस में बड़े मिलजुल कर रहते थे.

एक दिन तीनों दोस्तों ने साथ में विदेश यात्रा करने का फैसला किया और इस सफर के लिए उन्होंने पहले से ही बहुत सारी तैयारियां कर ली थी.

उन्होंने विदेश में एक अच्छी होटल ढूंढ कर वहां अपना कमरा भी बुक करवा दिया था.

उन्होंने जिस होटल में अपना कमरा बुक करवाया था वह होटल एक 75 मंजिला बड़ी आलीशान इमारत थी.

और उनका नसीब भी अच्छा था कि उन्हें होटल का सबसे ऊपर वाला कमरा यानी कि 75 वीं मंजिल पर मिला जहां से वह पूरे शहर का नजारा देख सकते थे.

तीनों दोस्त जब हवाई यात्रा करके विदेश पहुंचे और अपनी होटल में गए. तो वहां के मैनेजर ने उनको सूचित किया कि

” इस शहर का एक कानून है. यहां रात 12:00 बजे के बाद शहर की सभी होटले बंद हो जाती है इसलिए आप दिनभर पूरे शहर में कहीं भी घूम सकते हैं लेकिन रात 12:00 बजे से पहले होटल में वापस आ जाना. क्योंकि उसके बाद आपको होटल में प्रवेश तो मिलेगा लेकिन किसी भी स्थिति में आप लिफ्ट का उपयोग नहीं कर सकेंगे. ”

सफर के पहले दिन तीनों दोस्तों ने पूरे शहर में दिनभर खूब मजे किए और खूब खाया पिया.

हालांकि उन्हें होटल के मैनेजर की सूचना याद थी इसलिए वह रात 12:00 बजे से पहले होटल में वापिस आ गए.

सफर के दूसरे दिन भी ऐसा ही हुआ और तीनों दोस्त सही वक्त पर होटल वापस आ चुके थे.

लेकिन तीसरे दिन तीनो दोस्त शहर से दूर लॉन्ग ड्राइव पर निकल चुके थे.

और वहां से वापस आने में उन्हें काफी देर हो चुकी थी.

(ये कहानी आप हिंदीस्पीक.कॉम पर पढ़ रहे है – कहानी अभी जारी है..)

जब उन्हें होटल के मैनेजर की सूचना याद आई तब देर हो चुकी थी और 12 तो कब के बज चुके थे.

लिहाजा 12:00 बजे के बाद होटल पर आने से उन्हें होटल में प्रवेश तो मिला लेकिन लिफ्ट बंद कर दी गई थी.

तीनों दोस्तों ने देखा कि अब उन्हें अपने कमरे तक जाने के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ने पड़ेगी और इसके सिवाय और कोई विकल्प नहीं है.

आखिरकार तीनों दोस्तों ने ये तय किया कि वह सीढ़ियां चढ़कर ही अपने कमरे तक जाएंगे.

लेकिन सीढ़ियां चढ़ने के थका देने काम उस उनके लिए परेशानी ना बने इसलिए वो उसे मजेदार बनाएंगे.

पहले दोस्त ने कहा कि वो 1 से 25 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ते हुए अन्य दो दोस्तों को मजेदार चुटकुले, जोक और शेरो शायरी सुनाएगा.

जिस वजह से हंसी मजाक करते हुए 25 मंजिल तक का सफर आसानी से कट जाएगा.

इसी तरह उसका सफर शुरू हुआ और पहले दोस्त ने 25 वी मंजिल तक मजेदार और हंसाने वाले चुटकुले सुना कर दोनों दोस्तों के साथ 25 वीं मंजिल तक का सफर तय कर लिया.

अब दूसरे दोस्त की बारी थी.

उस दोस्त ने कहा कि वह 25 से 50 मंजिल तक के सफर में अन्य दो दोस्तों को कुछ सच्चे किस्से और कहानियां सुनाएगा.

उसने ठीक वैसा ही किया. सच्चे किस्से की कहानियों की वजह से माहौल गंभीर बन चुका था.

जैसे तैसे करके तीनों दोस्त होटल की 50 वीं मंजिल तक पहुंच गए.

अब तीसरे दोस्त की बारी थी. लेकिन 50 ही मंजिल तक पैदल सीढ़ी चढ़ने की वजह से तीनों दोस्त अब बहुत थक चुके थे.

तीसरे दोस्त ने कहा कि वो अब यहां से 75 मंजिल तक गमगीन और दुख भरे किस्से सुनाएगा और उसने ठीक वैसा ही किया.

(ये कहानी आप हिंदीस्पीक.कॉम पर पढ़ रहे है – कहानी अभी जारी है..)

आखिर में तीनों दोस्त होटल की आखरी मंजिल यानी कि 75 वीं मंजिल तक पहुंच चुके थे.

यहां पहुंच कर तीसरे दोस्त ने अन्य दो दोस्तों से कहा कि अब मेरी दुख भरी कहानी का आखरी पहलू यह है कि हम अपने कमरे की चाबी नीचे काउंटर पर ही भूल आए हैं.

यह सुनकर अन्य दो दोस्त बेहोश होकर वहीं गिर पड़े और तीसरा दोस्त भी उन्हें देख कर बेहोश हो गया.

(एक मिनट … यह कहानी यहां पूरी नहीं हो रही कहानी का असली भाग तो अभी शुरू हो रहा है)

सीख / Moral Story for Students

यह कहानी कोई वास्तविक घटना या हकीकत नहीं है. लेकिन मेरी और आपकी जिंदगी की एक परछाई जरूर है.

इस कहानी में मेरे और आपके लिए एक सीख छुपी हुई है.

हम अपनी जिंदगी के पहले 25 साल हंसने खेलने और इंजॉय करने में ही गुजार देते हैं.

और यह वक्त इतना जल्दी से बीत जाता है कि हमें पता ही नहीं रहता कि कब 25 साल हो गए.

इसके बाद के 25 साल यानी कि 25 से 50 तक की जिंदगी कुछ गंभीर मामलों के बीच गुजर जाती है.

जैसे कि शादी, बच्चे, रोजगार, खाना-पीना, मकान और अपनी इच्छाओं को पूरी करने में बीत जाती है.

आखिर में शुरू होता है 50 से 75 साल की जिंदगी का सफर.

यह हमारी जिंदगी का सबसे दुख भरा सफर होता है.

इस उम्र में अस्पताल और दवाइयों के बीच दिन बीतते हैं.

कभी-कभी बेटे या बेटे के संतानों से भी दुख पहुंचता है यातनाएं अलग-अलग वेश बदलकर हमारा पीछा नहीं छोड़ती.

यहां तक कि हम मौत की दहलीज पर पहुंच जाते हैं.

और जब मौत का वक्त नजदीक आने लगता है तो हमें महसूस होता है कि ..

हम वह चाबी लाना तो भूल ही गए हैं जिसे हम जिंदगी की सफलता के लिए जरूरी मानते थे.

उस चाबी से शायद हमारी जिंदगी के आखिरी पड़ाव को अच्छे से गुजार सकते थे.

जिंदगी के दौरान हमने दूसरों को फायदा पहुंचाने वाले कोई काम को अंजाम ही नहीं दिया होता.

इसलिए अब इस समय सिर्फ अफसोस और निराश होने के सिवा कोई चारा बाकी नहीं रहता.

हर इंसान को ये याद रखना चाहिए कि मौत जिंदगी का एक ऐसा रिटायरमेंट पीरियड है.

जिसमें उम्र की कोई सीमा नहीं है. किसे, कब आ जाए इसके बारे में कोई नहीं जानता.

हां ये बात बिल्कुल सही है कि

आप अपनी जिंदगी की 75 वीं मंजिल पर चाबी लेकर पहुंचते हो या बगैर चाबी के.

हमें उम्म्मीद है की आपको Moral Story for Students पसंद आई होगी.

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